Uttarakhand : 9 घंटे की नौकरी, फिर भी IAS का सपना किया पूरा !

Uk positive news: कहते हैं कि अगर इरादे पक्के हों और कुछ कर गुजरने की लगन हो, तो रास्ते की हर रुकावट महज एक बहाना बन जाती है। इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिखाया है बिहार के नालंदा की रहने वाली श्वेता भारती ने। दिनभर की 9 घंटे की नौकरी, पारिवारिक जिम्मेदारियों और तमाम संघर्षों के बावजूद श्वेता ने अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी (UPSC 2021) सिविल सेवा परीक्षा में 356वीं रैंक हासिल कर सफलता का परचम लहराया है।
इंजीनियरिंग के बाद विप्रो में नौकरी, पर नहीं छोड़ा आईएएस बनने का सपना-
नालंदा की रहने वाली श्वेता ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईटी कंपनी ‘विप्रो’ में नौकरी शुरू की। परिवार की जिम्मेदारियां ऐसी थीं कि वह नौकरी छोड़कर पूरी तरह से पढ़ाई पर निर्भर नहीं हो सकती थीं। लेकिन उनके दिल में सिविल सेवा में जाने का जो सपना पल रहा था, उसने उन्हें रुकने नहीं दिया। उन्होंने ऑफिस के काम और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य बैठाया और अपनी पढ़ाई जारी रखी
हर शाम और रात को बनाया अपनी सफलता का आधार-
नौकरी के बाद बचे हुए समय का सदुपयोग करना ही श्वेता की सफलता का सबसे बड़ा मंत्र रहा। उन्होंने दिनभर ऑफिस में 9 घंटे काम करने के बाद हर शाम और रात को बिना चूके पढ़ाई के लिए समर्पित किया। तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बना ली, ताकि उनका पूरा फोकस सिर्फ और सिर्फ अपने लक्ष्य पर रहे।
बीपीएससी में भी बजा चुकी हैं सफलता का डंका
संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। यूपीएससी में सफलता पाने से पहले श्वेता ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा भी पास की थी और वर्तमान में वे डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम ऑफिसर के पद पर कार्यरत थीं। बावजूद इसके, उनका अंतिम लक्ष्य आईएएस (IAS) बनना था और उसी जुनून ने उन्हें यूपीएससी के इस मुकाम तक पहुंचाया।
लाखों युवाओं के लिए बनीं मिसाल
आज श्वेता भारती उन लाखों युवाओं के लिए एक जीवंत मिसाल हैं, जो यह सोचते हैं कि नौकरी या पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ यूपीएससी की तैयारी करना असंभव है। श्वेता ने यह साबित कर दिया कि यदि समय का सही प्रबंधन और अटूट दृढ़ संकल्प हो, तो बड़े से बड़ा मुकाम भी हासिल किया जा सकता है।



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