इश्क़ या ‘गुनाह’? मक्का में बांग्लादेशी जोड़े का दर्दनाक अंत!

रियाद/ढाका: सऊदी अरब के मक्का शहर स्थित एक मस्जिद के भीतर कथित तौर पर ‘अनैतिक और अशिष्ट आचरण’ के आरोप में एक बांग्लादेशी दंपती को सऊदी प्रशासन द्वारा सजा-ए-मौत दिए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सऊदी अरब की न्यायिक प्रणाली और कड़े कानूनों को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है।
क्या है पूरा मामला?i
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उमराह करने गए बांग्लादेशी नागरिक नजरुल इस्लाम और उनकी पत्नी सीती अख्तर पर मक्का की एक मस्जिद के अंदर एक-दूसरे के माथे को चूमने का आरोप था। सऊदी अरब के गृह मंत्रालय और स्थानीय न्याय व्यवस्था के तहत इस कृत्य को धार्मिक स्थल की पवित्रता के खिलाफ गंभीर उल्लंघन माना गया। 14 अक्टूबर को मक्का में दोनों को सजा-ए-मौत दी गई, जिसके बाद 19 अक्टूबर को उनके शव बांग्लादेश पहुंचे।
इस दंपती की एक 8 साल की मासूम बेटी है, जो इस घटना के बाद पूरी तरह अनाथ हो चुकी है। मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक स्तर पर आलोचकों का कहना है कि सऊदी अरब के बर्बर कानूनों ने एक छोटी बच्ची को उसके माता-पिता का साया छीनकर अनाथ कर दिया है।
सऊदी अरब के कड़े कानून
सऊदी अरब में मौत की सजा पाए कैदियों को आमतौर पर सार्वजनिक रूप से या जेल के भीतर सिर कलम करके (या कुछ विशेष मामलों में फायरिंग स्क्वाड के जरिए) मौत की सजा दी जाती है। यह नियम वहां के स्थानीय नागरिकों के साथ-साथ विदेशी नागरिकों पर भी समान रूप से सख्ती से लागू किए जाते हैं।
भारत और सऊदी अरब की न्यायिक प्रणालियों में अंतर
इस घटना के सामने आने के बाद दुनिया भर में विभिन्न देशों की न्याय प्रणालियों की तुलना की जा रही है। यदि इस तरह के मामलों की तुलना भारतीय न्याय व्यवस्था से की जाए, तो यहाँ का कानून पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक प्रावधानों पर आधारित है:
- सजा का स्वरूप: भारत में इस प्रकार के मामलों में सजा धर्म की पवित्रता के आधार पर नहीं, बल्कि ‘पब्लिक ऑर्डर’ (सार्वजनिक व्यवस्था) और धार्मिक भावनाओं को आहत करने के दायरे में तय होती है।
- कानूनी धाराएं: ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296 (पुरानी IPC की धारा 294) के तहत सार्वजनिक स्थल पर अशिष्ट या आपत्तिजनक हरकत करने पर कुछ महीनों की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। ज्यादातर मामलों में पुलिस मामूली चेतावनी या चालान के बाद छोड़ देती है।
- गंभीर स्थिति: यदि मामले का वीडियो बनाकर वायरल किया जाए और उससे जनभावनाएं भड़कती हैं, तो BNS की धारा 295A जैसी धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई और जमानत की प्रक्रिया होती है—लेकिन भारत में किसी भी परिस्थिति में मौत की सजा, कोड़े मारने या शरिया कानूनों जैसी सजाओं का कोई प्रावधान नहीं है.



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