उत्तराखंड : देवभूमि में निकला अनोखा राम भक्त! जानिए कौन है ये?

भगवान राम के भक्तों की कई अनोखी कहानियां त्रेता युग से प्रचलित हैं। भगवान राम के नाम को जीवन का प्रथम और अंतिम सत्य बताया गया है। राम भक्तों की आस्था का कोई कारण या स्वार्थ नहीं है, अपने प्रभु के जीवन से प्रेरणा लेकर सभी भक्त उनको अपना आराध्य मानकर पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान राम के सबसे बड़े भक्त थे हनुमान जिनके सीने में भी राम थे उसी तरह समुद्र पर बने सबसे पहले पुल राम सेतु के निर्माण में लगे हर पत्थर पर राम लिखा हुआ है।

उत्तराखंड में भी भगवान राम के ऐसे ही एक बहुत बड़े भक्त की कहानी सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। 62 वर्षीय इस व्यक्ति का कहना है कि पिछले 32 सालों में इसने 32 करोड़ बार राम नाम लिखा है। तो आइए जानते हैं इस अनोखे राम भक्त के दावे के पीछे की पूरी कहानी। उत्तराखंड जिला अल्मोड़ा के सल्ट निवासी शंभु दयाल खर्कवाल की राम भक्ति की हर तरफ चर्चा हो रही है। 1990 में राम नाम का जप करते समय शंभु को एक विचार आया जो आज किसी वर्ल्ड रिकॉर्ड से कम नहीं है। वो विचार था राम नाम लिखने का, छोटी सी चाय की दूकान चलाने वाले शंभु दयाल का आदर्श वाक्य भी ‘राम राम बोल, राम राम सुन, राम राम लिख’ है। उनके द्वारा 32 वर्षों में 32 करोड़ बार राम नाम लिखे जाने की पुष्टि उन्हें जानने वाले उनके परिवारजन, मित्र और रोजाना ग्राहक भी करते हैं।

उत्तराखंड में भी भगवान राम के ऐसे ही एक बहुत बड़े भक्त की कहानी सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। 62 वर्षीय इस व्यक्ति का कहना है कि पिछले 32 सालों में इसने 32 करोड़ बार राम नाम लिखा है। तो आइए जानते हैं इस अनोखे राम भक्त के दावे के पीछे की पूरी कहानी। उत्तराखंड जिला अल्मोड़ा के सल्ट निवासी शंभु दयाल खर्कवाल की राम भक्ति की हर तरफ चर्चा हो रही है। 1990 में राम नाम का जप करते समय शंभु को एक विचार आया जो आज किसी वर्ल्ड रिकॉर्ड से कम नहीं है। वो विचार था राम नाम लिखने का, छोटी सी चाय की दूकान चलाने वाले शंभु दयाल का आदर्श वाक्य भी ‘राम राम बोल, राम राम सुन, राम राम लिख’ है। उनके द्वारा 32 वर्षों में 32 करोड़ बार राम नाम लिखे जाने की पुष्टि उन्हें जानने वाले उनके परिवारजन, मित्र और रोजाना ग्राहक भी करते हैं।

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शंभु दयाल की अनोखी राम भक्ति की सराहना इसलिए भी हो रही है क्योंकि जिस समय राम के नाम के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था, उस समय से आज तक इन्होंने कभी भी हार नहीं मानी। भगवान राम का आशीर्वाद अपने भक्तों पर अच्छी बुरी हर परिस्थिति में बना रहता है यह इस बात का जीवित प्रमाण है। 32 वर्षों में 32 करोड़ बार राम लिखते समय शंभु दयाल को नजाने कितनी परीक्षाओं से गुज़ारना पड़ा होगा और सच्ची भक्ति का ही यह परिणाम है कि उनकी भक्ति आज हर भक्त के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है।