Uttarakhand: शिक्षा में मनमानी पे प्रशासन सख्त! पढ़िए किन 12 निजी स्कूलों को मिला नोटिस!

उत्तराखंड : पहले ही 38 स्कूलों पर कार्रवाई, अब तक 50 निजी विद्यालयों को जारी हो चुके नोटिस।
जिला प्रशासन नैनीताल ने निजी विद्यालयों की मनमानी पर सख्त रुख अपनाते हुए 12 और स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशों पर मुख्य शिक्षा अधिकारी गोविंद राम जायसवाल द्वारा की गई है।
शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन विद्यालयों को नोटिस जारी किया गया है, उनमें वेदान्तंम इंटरनेशनल स्कूल, चिल्ड्रन वैली पब्लिक स्कूल, न्यू बाल संसार स्कूल, आरुष पब्लिक स्कूल, जी किड्स पब्लिक स्कूल, काठगोदाम पब्लिक जूनियर हाईस्कूल, लिटिल स्पार्कल एकेडमी, मानस पब्लिक स्कूल, नेशनल पब्लिक स्कूल, श्री कृपा पब्लिक स्कूल, सेंट जॉर्ज स्कूल और समिट पब्लिक स्कूल शामिल हैं।
इससे पहले हल्द्वानी, लालकुआं, रामनगर, भवाली और भीमताल क्षेत्र के 38 विद्यालयों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। अब तक कुल 50 निजी विद्यालय प्रशासन की कार्रवाई के दायरे में आ चुके हैं।


जांच में सामने आईं ये अनियमितताएं-


जांच के दौरान पाया गया कि कई विद्यालयों द्वारा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम के अलावा महंगी निजी प्रकाशनों की किताबें अनिवार्य की जा रही हैं, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।


इसके साथ ही कुछ स्कूलों द्वारा विशेष दुकानों से किताबें खरीदने का दबाव बनाने और वेबसाइट पर आवश्यक जानकारी सार्वजनिक न करने जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।
इन कानूनों के तहत हो रही कार्रवाई
यह कार्रवाई ‘बच्चों को निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ और ‘उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019’ सहित उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में की जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावकों के लिए न्यायसंगत बनाना है।


विद्यालयों को दिए गए सख्त निर्देश-


15 दिनों के भीतर संशोधित पुस्तक सूची जारी करें और एनसीईआरटी को प्राथमिकता दें
किसी भी विशेष विक्रेता से खरीद की बाध्यता समाप्त करें
वेबसाइट पर फीस और पुस्तक सूची का पूर्ण विवरण सार्वजनिक करें
अनावश्यक खरीदी गई पुस्तकों पर धनवापसी/समायोजन करें
अतिरिक्त वसूली गई फीस का समायोजन करें
अनुपालन नहीं करने पर होगी सख्त कार्रवाई
जिलाधिकारी के निर्देश पर संयुक्त जांच समिति गठित की गई है, जो 15 दिनों में रिपोर्ट देगी। आदेशों का पालन न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ मान्यता निलंबन या निरस्तीकरण सहित कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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