उत्तराखण्ड

उत्तराखंड: ऋषिकेश के इस दंपति ने अपनी विधवा बहू का कन्यादान कर, समाज में पेश की सकारात्मकता की मिसाल

Uttarakhand News: शादी के बाद हर लड़की का ससुराल ही उसका घर होता है । विदाई के वक्त हर माता-पिता अपनी बेटी से कहते हैं कि बेटी जा तो डोली में रही हो अब पति के घर से अर्थी में ही जाना। अर्थात दुख हो या सुख हो लड़की को ससुराल में रहकर ही उसे सहना है।

विदाई के बाद लड़की के ससुराल में लड़की के सास – ससुर ही उसके माता पिता के रूप में होते हैं किंतु आज के कलयुग दौर में बहुत कम सास-ससुर है जो अपनी बहू को बेटी मानते हैं और उन्हें बेटी की तरह प्यार और मान सम्मान देते हैं।

बेटी को सास ससुर की जगह पर मां – बाप का प्यार देने वाले और बेटी की तरह ही सम्मान देने वाले ऐसे सास- ससुर से आज हम आपको रूबरू कराने जा रहे हैं जिन्होंने अपनी विधवा बहु के बेरंग जीवन मे दुबारा से रंग भर दिए ।

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दरअसल उत्तराखंड के ऋषिकेश के खैरी खुर्द निवासी आनंद स्वरूप लखेरा के बेटे प्रशांत लखेरा की शादी नवंबर 2020 को कंचन नाम की लड़की के साथ हुई थी शादी को मात्र 6 महीने ही हुए थे कि मई 2021 को प्रशांत को कोरोना संक्रमण के कारण सदा सदा के लिए इस दुनिया से विदा होना पड़ा । मात्र 25 साल की उम्र में प्रशांत की पत्नी कंचन विधवा हो गई । जहां एक ओर अभी नई-नई शादी हुई थी वहां इतना बड़ा मातम छा गया कि किसी ने सोचा भी नहीं था।

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प्रशांत तो इस दुनिया से विदा हो गया । पीछे बहुत सारी यादें छोड़ गया ,अपनी पत्नी और अपने रोते हुए मां-बाप को छोड़ गया । कंचन अभी मात्र 25 वर्ष की थी की विधवा हो गई। बूढ़े सास ससुर की आंखों में अपनी जवान बहू को विधवा देखने की हिम्मत नहीं रह गई थी । सास ससुर ने सोचा कि इस पहाड़ सी जिंदगी को यह इतनी कम उम्र में कैसे पार कर पाएगी तब उन्होंने कंचन का विवाह सुशील नामक व्यक्ति के साथ करना तय किया जिससे कि कंचन की बेरंग हुई जिंदगी में दोबारा से रंग भर सकें । वह दोबारा से पहले की तरह मुस्कुरा सके और खुश रह सके।

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कंचन और सुनील का विवाह 24 जून को सत्यनारायण मंदिर में हुआ। कंचन के सास ससुर ने पूरे वैदिक रीति रिवाज से कंचन का कन्यादान किया और उससे बहुत सारा आशीर्वाद दिया ।

आनंद स्वरूप और उनकी पत्नी सरोज दोनों ने अपनी विधवा बहू का विवाह करके समाज को एक सकारात्मकता का संदेश दिया है।

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