उत्तराखण्ड

उत्तराखंड : जानिए क्यों है कैलाश मानसरोवर यात्रा पथ पर पड़ने वाली व्यास घाटी इतनी खास

महर्षि वेदव्यास को कौन नहीं जानता ? जी हां हम बात कर रहे हैं महाभारत के रचयिता वेदव्यास जी की । महाभारत के रचयिता श्री वेद व्यास जी की तपस्थली व्यास घाटी में एक विशेष प्रकार की पूजा अर्चना की तैयारी इन दिनों शुरू हो गई है प्रत्येक वर्ष रक्षाबंधन के दिन शुरू होने वाली इस विशेष पूजा अर्चना में नेपाल और भारत के अनेकों श्रद्धालु अपनी शिरकत करते हैं पूजा में भाग लेने के लिए हिमालय गांव के कई लोग अब धीरे-धीरे इस पूजा में शरीक होने के लिए घर पहुंच रहे हैं दरअसल यह पूजा एक विशेष आकर्षण का केंद्र और खास इसलिए मानी जाती है क्योंकि कैलाश मानसरोवर यात्रा के रास्ते पर पड़ने वाली व्यास घाटी को भगवान शिव शंकर की ही पवित्र भूमि माना गया है ग्राम के लोग महादेव के साथ ही महर्षि वेदव्यास को भी अपना आराध्य एवं पूजनीय मानते हैं प्रत्येक वर्ष भादो माह में धूमधाम और हर्ष के साथ गुंजी, कुटी , नाभी, रौंककॉन्ग में महर्षि वेद व्यास की आरती पूजा बड़ी श्रद्धा भाव से की जाती है । इस स्थान पर श्री वेदव्यास जी की एक अत्यंत प्राचीन कालीन गुफा भी है ।यहां पूजा अर्चना आरंभ करने से पूर्व सारे क्षेत्र के पवित्र मंदिरों में ऊंची ऊंची पताकाएँ लगाने के साथ सजाया संवारा जाता है ।
यहां इस विशेष पूजा में आमंत्रित होने के लिए नेपाल के तिंकर, छांगरु , रापला और स्याकांग गांव के नागरिकों को बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ बुलाया जाता है । यहां यह परंपरा अत्यंत प्राचीन काल से चली आ रही है ।एवं भगवान शिव के और महर्षि वेदव्यास जी के प्रति अटूट आस्था एवं श्रद्धा की प्रतीक बनती रही है ।

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