उत्तराखण्ड

उत्तराखंड: महिला सशक्तिकरण का सच्चा उदाहरण है देवभूमि की यह बेटी, प्रेरणात्मक है इनकी कहानी

Uttarakhand News: सफलता का रास्ता मुश्किलों के बवंडर से निकलकर जाता है। परेशानियां तो हर किसी के आगे हैं मगर उन परेशानियों के आगे सिर उठाकर खड़े होने की कुव्वत कम ही लोग कर पाते हैं। जो ये हिम्मत कर पाते हैं, बात उन्हीं की होती है। हल्द्वानी की नेहा पांडे शहरवासियों को घर बैठे बैठे साउथ इंडिया की भोजन यात्रा पर ले जाने का काम कर रही हैं। दरअसल नेहा पांडे हल्द्वानी में साउथ इंडिया का हर वो जायका तैयार करती हैं जो तमिलनाडू या दक्षिण की ओर खाया जाता है।

हल्द्वानी लालडांठ की हिम्मतपुरम कॉलोनी में रहने वाली नेहा पांडे को अभिनव प्रयास का पर्यायवाची कहा जाए तो काफी नहीं होगा। बल्कि इसके साथ उन्हें परिश्रमी व योद्धा का समानार्थी भी कहा जा सकता है। नेहा पांडे ने पिछले साल मार्च से अपने घर पर ही साउथ इंडिया का जायका बनाना शुरू किया। उन्होंने एडवांस बुकिंग पर ऑर्डर तैयार किए। वसंता फूड्स के नाम से रोजगार का जरिया ढूंढ रहीं नेहा पांडे घर घर खाना पहुंचाती हैं। अब उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत लोन स्वीकृत हो गया है।

हो सकता है कि आपको ये कहानी सिर्फ एक कहानी लग रही हो। लेकिन ये एक कहानी से बहुत बढ़कर है। दरअसल नेहा पांडे ने आज से करीब आठ साल पहले अपने पति को खो दिया था। उनका विवाह तमिलनाडू में हुआ था। गौरतलब है कि पति के निधन के बाद उनके सिर पर ना सिर्फ दुखों का पहाड़ टूट पड़ा बल्कि बच्चों की देखरेख करने की भी पूरी जिम्मेदारी कंधों पर आ गई। आपदा को अवसर में बदलने का हौसला रखने वाली नेहा पांडे धीरे धीरे अपने पैरों पर खड़े हुईं। पढ़ाई में एमबीए की डिग्री हासिल कर चुकी नेहा को सात-आठ साल एचपी जैसी कई कंपनियों में नौकरी करने का अनुभव भी प्राप्त हुआ।

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अब उन्होंने अपने शहर हल्द्वानी में रोजगार ढूंढने की कवायद शुरू की है। कोरोना काल में जब कोरोना योद्धा जैसे पुलिसकर्मी, अस्पताल कर्मी बिना फुरसत लोगों की सेवा में लगे थे। तब नेहा पांडे वसंता फूड्स के माध्यम से उन्हें खाना खिला रही थीं। उन्होंने एक से अनेक नाम की खास पहल भी शुरू की थी। जिसके तहत प्रतिदिन मिलने वाले ऑर्डर की संख्या के बराबर फूड पैकेट वह कोरोना वारियर्स के लिए तैयार करती थीं। इस पहल को पूरे हल्द्वानी में सराहना मिली थी। नेहा पांडे के माता-पिता पंतनगर के मूल निवासी हैं।

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हल्द्वानी की नेहा पांडे महिला सशक्तीकरण के नारे को सिर्फ बोल नहीं रही हैं बल्कि खुद सशक्त होकर इस नारे को बुलंदी की ओर ले जा रही हैं। अभी वे तीन ही लोग साथ में काम करते हैं। जिनमें से एक उनके पारिवारिक मित्र देवातोष श्रीवास्तव हैं, जो अब हल्द्वानी शिफ्ट हो चुके हैं। खास बात ये है कि नेहा पांडे आने वाले समय में महिलाओं के लिए रोजगार के मौके बनाना चाहती हैं। वह धीरे धीरे साउथ इंडिया के विशेष पकवानों को हल्द्वानी की हर थाली तक ले जाना चाहती हैं। शुद्ध शाकाहारी भोजन बनाने वाली नेहा पांडे मन की दृढ़ता और शुद्धता से प्रदेश के सामने मिसाल पेश कर रही हैं।

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