उत्तराखण्ड

उत्तराखंड: देवभूमि की इस महिला किसान ने मशरूम की खेती कर बढ़ाया स्वरोजगार की ओर कदम

Uttarakhand News : यदि दिल में सच्ची लगन हो तो इंसान क्या नहीं कर सकता पर इस कहावत को सच कर दिखाया है देहरादून जिले के नकरौंदा ग्राम निवासी गीता उपाध्याय ने जिन्हें कि महिला किसान के रूप में भी जाना जाता है ।

आज पहाड़ों पर पलायन बहुत अधिक हो रहा है । ऐसे में बहुत कम लोग हैं जो पहाड़ों में रच बस कर वहीं अपना रोजगार ढूंढना चाह रहे हैं और स्वरोजगार को बढ़ावा दे रहे हैं इसी कड़ी में स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने वाली गीता उपाध्याय भी है।

दरअसल गीता उपाध्याय ने ढँगरी मशरूम के उत्पात से स्वरोजगार का कार्य शुरू किया था जो कि आज बहुत अच्छे स्तर पर चल रहा है । गीता उपाध्याय देहरादून के नकरौंदा गांव स्थित जीरो पॉइंट क्षेत्र में अजय स्वावलंबन केंद्र का संचालन करती है। यहां समन्वित खेती जिसमें सब्जी उत्पादन , पशुपालन और मत्स्य पालन शामिल है। इसके साथ ही ढिंगरी मशरूम उत्पादन भी गीता ने किया । गीता के साथ उनके पति दीपक उपाध्याय भी कई सालों से इसी काम को कर रहे हैं।

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आज गीता पहाड़ो में रह कर जिस तरह से लाखों रुपये कमा रहीं हैं , वो काबिले ए तारीफ है।

गीता ढींगरी मशरूम के उत्पादन के संबंध में बताती हैं कि इसमें सबसे खास बात यह है कि आपको उत्पादन कक्ष के तापमान और स्वच्छता का बहुत ज्यादा ख्याल रखना पड़ता है । जैविक रूप से उत्पादित मशरूम का बाजार भाव भी अधिक है जिससे कि इस तरीके का उत्पात करने वाले को अच्छी खासी रकम मिल जाती है।

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गीता का कहना था कि करोना काल के समय मशरूम की डिमांड बहुत ज्यादा बढ़ गई थी । मशरूम का सूप स्वाद में अच्छा होने के साथ ही शरीर के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है ,और इसको आप अपने पास संरक्षित भी कर सकते हैं।

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किसान गीता उपाध्याय ने स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाते हुए बहुत सारे बेरोजगार लोगों को अपने साथ जोड़ा है और उनको भी जीविकोपार्जन के साधन उपलब्ध कराएं हैं।

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