उत्तराखण्ड

उत्तराखंड: देवभूमि के इस बस चालक ने 42 यात्रियों को दिया जीवनदान, जानिए कैसे

Uttarakhand News: पर्वतीय मार्गों पर सफर करना हमेशा ही कठिन रहता है। यात्रियों के अलावा चालक और परिचालक के लिए भी इम्तिहान होता है कि वह सफलतापूर्व गंतव्य तक पहुंचे। कई बार पर्तवीय मार्गों पर बस के ब्रेक फेल होने के मामले सामने आते हैं और चालक की सूझबूझ से हादसा टल जाता है। इसी तरह का एक केस 13 जून को सामने आया है। पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर रोडवेज की बस में सवार 42 यात्रियों को चालक बसंत पांडे ने नया जीवन दिया है।

घटना चंपावत बाराकोट के पास की है जब ढलान में बस के ब्रेक नहीं लगे। ब्रेक खराब होने की जानकारी यात्रियों को जैसे ही लगी तो चीखपुकार मच गई। चालक बसंत ने परिस्थिति से विपरीत अपना संय़म नहीं खोया और बस को खाई के विपरीत दिशा में पहाड़ी वाले हिस्से से टकरा दिया। इससे बस कुछ मीटर दूर अटक गई। बस में सवार कुछ यात्रियों को चोट लगी जिन्हें लोहाघाट उप जिला अस्पताल भेजा गया। वहीं बस में सवार लोगों को रोडवेज की दूसरी बस से पिथौरागढ़ भेजा गया।

इस हादसे के बाद सभी लोगों ने बसंत पांडे का शुक्रिया अदा किया जो 25 साल से रोडवेज बस चला रहे हैं। उन्होंने कहा कि बस घटना स्थल के कुछ दूर पहले जब उन्हें ब्रेक लगाए थे तो वह नहीं लगें। उन्हें कुछ गड़बड़ होने का आभास हो गया लेकिन यात्रियों की जिंदगी बचाना एक बड़ी परीक्षा थी। उन्होंने बस को खाई से विपरीत दिशा की ओर किया और सड़क की लंबी चौड़ाई होने का फायदा उठाया और पहाड़ी से बस को टकरा दिया। इससे बस खाई में जाने से बच गई। एक चालक कैसे यात्रियों की रक्षा करता है एक बार फिर साबित हुआ।

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