उत्तराखण्ड

उत्तराखंड: आत्मनिर्भर हो रही हैं हाट गांव की महिलाएं, जानिए कैसे

Uttarakhand News: आज के कठिन समय सबसे अधिक कठिन काम हो गया है नौकरी ढूंढना और जीविका उपार्जन के स्रोत ढूंढना। सुबह से शाम तक हर कोई व्यक्ति पैसे कमाने की जद्दोजहद में लगा हुआ है। हम में से बहुत से लोग ऐसे भी हैं जोकि जीविका उपार्जन के लिए अपने शहर अपने राज्य को छोड़कर कहीं दूर जाकर कोई ना कोई काम कर रहे हैं और अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं।

आज के वर्तमान समय में भी खराब होने के कारण कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने राज्य में रहकर भी स्वयं का स्वरोजगार कर रहे हैं और अपने कार्य को न सिर्फ बढ़ावा दे रहे हैं बल्कि कई और लोगों को भी अपने साथ जोड़कर उनके लिए भी जीविकोपार्जन के स्रोत बना रहे हैं।

रोजगार के क्षेत्र में बढ़ते हुए यूं तो आपने और भी कई लोगों को देखा और सुना होगा। आज इसी कड़ी में हम आपको रूबरू करवाने जा रहे हैं धारचूला ब्लाक के ग्राम पंचायत जिला देहात के हाट गांव की कुछ महिलाओं से। जिन्होंने एलइडी बल्ब बनाकर स्वरोजगार अपनाया है । इस कार्य से स्वावलंबी बनी महिलाओं ने अपने साथ-साथ अन्य लोगों को भी सहारा दिया है।

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दरअसल हाट गांव की महिलाओं ने 7 स्वयं सहायता समूह बनाए हैं, इन समूहों को मिलाकर सरस्वती ग्राम संगठन बनाया है।

पहाड़ की है महिलाएं जहां एक ओर खेती बाड़ी पशुपालन का कार्य करतीं हैं वही दूसरीओर इन्होंने एलईडी बल्ब बनाना सीखा नोएडा से कच्चा माल मंगाया। अपने रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से 2 घंटे निकाल कर यह महिलाएं पंचायत घर हाट में बैठ कर एलईडी बल्ब तैयार कर रही हैं ।

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यही नहीं है महिलाएं स्वयं बाजार जाकर बाजार से भी कम दामों में एलईडी बल्ब बेच रही है इसके साथ साथ ही इन महिलाओं ने एलईडी की चार्जिंग बल्ब बनाना और खराब हुए चार्जर को दोबारा से सुधारना भी सीख लिया है।

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बता दें कि यह बल्ब 5 ,9 ,12 वाट के हैं। महिलाओं के स्वरोजगार की ओर बढ़ते हुए इस कदम को देखकर वहां के लोगों ने उन्हें बहुत अधिक सराहा है। ग्राम संगठन के अध्यक्ष द्रोपदी धामी का कहना है कि ऐसी महिलाएं समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और सभी को प्रेरित करती हैं कि वह किस तरीके से अपने रोजमर्रा के कार्यों से सामंजस्य बैठा के कैसे खुद का स्वरोजगार भी कर सकती हैं ।

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