उत्तराखण्ड

उत्तराखंड: पद्मश्री मालिनी अवस्थी की यादों में बसा लाल कुआं, जानिए लोक गायिका ने लाल कुआं के बारे में क्या कहा

Uttarakhand News: :रविवार को संपन्न हुए हल्द्वानी लिटरेचर फेस्टिवल में कई विख्यात हस्तियां पहुंची और अपने अनुभवों को साझा किया। इसके अलावा सभी ने अपनी उत्तराखंड से जुड़ी यादों को भी दर्शकों के बीच रखा।

हल्द्वानी लिटरेचर फेस्टिवल में पद्मश्री लोक गायिका मालिनी अवस्थी भी पहुंची और उन्होंने कहा कि वह काफी वक्त तक अल्मोड़ा जिले के रानीखेत में रहीं हैं । वह रानीखेत जाने के लिए लालकुआं तक ट्रेन से यात्रा करती थी। लालकुआं की जलेबी उन्हें बहुत पसंद थी और इस वजह से वो यहीं उतरती थीं । उन्होंने लालकुआं की जलेबी को वर्ल्ड फेमस करार दिया। मालिनी अवस्थी ने कहा कि जब भी वह ट्रेन से लाल कुआं स्टेशन में उतरती थी तो सबसे पहले लालकुआं की जलेबी का स्वाद लेती थीं । उन्हें लालकुआं की जलेबी बेहद पसंद थी उसका स्वाद चखने के बाद ही वह आगे बढ़ती थी।

लिटरेचर फेस्टिवल में पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने कई गीत सुना कर लिटरेचर फेस्टिवल में पहुंचे लोगों मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने लालकुआं, हल्द्वानी और रानीखेत से जुड़ी यादों को भी दर्शकों से साझा किया और कहा कि देवभूमि का अनुभव और इसकी अनुभूति ही अलग है।

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लोक गायिका मालिनी ने संस्कृति व लेखकों को भारतीय संस्कृति की पहचान बताया। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रनिर्माण में महिलाओं की भागेदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश को आर्थिक मजबूती देने के महिलाएं सबसे आगे हैं , लेकिन फिर भी हमारे समाज मे महिलाएं सबसे अधिक शोषित करी जाती हैं। जैसे किसान शब्द का इस्तेमाल करने पर जेहन में पहली बार पुरुष ही आता है, जबकि धान की रोपाई करते समय सबसे अधिक महिलाएं ही खेतों पर दिखती हैं। पूरे देश में कृषि में आधे से अधिक काम महिलाएं कर रही हैं। हमारे समाज में पुरुष प्रधानता का भाव सबसे अधिक है।

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