उत्तराखण्ड

उत्तराखंड: देवभूमि की बेटी कंचन नेगी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया राज्य का मान

देहरादून, उत्तराखंड की डॉ. कंचन नेगी ने “शी इज़ ग्लोबल”, ग्रेस लेडीज़, सिंगापुर द्वारा आयोजित “अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह” पर अपने नाम पर एक और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, “महिला सशक्तिकरण और प्रेरणा पुरस्कार 2022 का वैश्विक पुरस्कार” जोड़ लिया है। डॉ कंचन नेगी, एक अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक, अनुसंधान और विकास विशेषज्ञ, शिक्षाविद्, मीडिया और इवेंट विशेषज्ञ, लाइफ स्किल्स कोच, डीडी उत्तराखंड के साथसमाचार वाचक और एक सामाज सेविका हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर , अपने उत्कृष्ट कार्यों के लिए 40 से अधिक पुरूस्कार अपने नाम किये हैं । वे आपका बिजनेस सॉल्यूशंस की संस्थापिका हैं, राष्ट्रीय स्तरीय एनजीओ-संगुइन वी केयर वेलफेयर सोसाइटी-वी केयर फॉर बेटर टुमॉरो की संस्थापिका और अध्यक्ष हैं।

Dr कंचन नेगी उत्तराखंड हेरिटेज मीडिया की एडिटर इन चीफ हैं, डॉ. कंचन कॉर्पोरेट, शिक्षा संस्थानों और सरकारी संगठनों के साथ मिलकर काम करती हैं, उन्हें अनुकूलित प्रशिक्षण देती हैं औरआईईसी सेवाएं भी प्रदान करती हैं। एक शिक्षाविद्, एक उत्साही पाठक, लेखक और वक्ता होने के नाते, वह न केवल भारत और विदेशों में स्कूलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों के लिए एक मार्गदर्शक सितारा रही हैं, बल्कि उनके प्रशिक्षण सत्र कॉर्पोरेट के साथ-साथ सरकारी क्षेत्रों के लिए भी अत्यधिक फायदेमंद हैं।

इसके अलावा, डॉ नेगी ने विभिन्न विभागों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों / सेमिनारों / सम्मेलनों के आयोजन और प्रबंधन के साथ-साथ प्रधान मंत्री के कार्यक्रमों का तीन बार संचालन भी किया है। इसके अलावा, वह एक सामाजिक सुधारक के रूप में बहुत सक्रिय और महिलाओं के उत्थान और उनके सशक्तिकरण के लिए सर्वदा कार्यरत हैं , जिसके लिए उन्हें विश्व स्तर पर पहचान मिली है।

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इसके अलावा, डॉ कंचन को पूर्व में एशिया की असाधारण महिला उत्कृष्ट पुरस्कार, एशिया प्रशांत उत्कृष्टता पुरस्कार, अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक के रूप में उत्कृष्टता का पुरस्कार, महिला सुपर अचीवर अवार्ड, मोस्ट इंस्पीरेशनल वुमन अवार्ड , नारी शक्ति सम्मान, ग्लोबल बिजनेस आइकन पुरस्कार ,राज्य का सबसे प्रतिष्ठित तीलू रौतेली पुरस्कार के साथ – साथ कई एनी पुरूस्कार मिले हैं . ये मानती हैं कि अनुभव कहता यदि मेहनत आदत बन जाए तो कामयाबी मुकद्दर ज़रूर बन जाती है , इसीलिये चाहे जो भी उतार चढ़ाव आयें , हमें मेहनत करना नहीं छोड़ना चाहिए.

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