उत्तराखण्ड

बिच्छू घास, सिसूंण(कंडाली) है औषधीय गुणों से भरपूर, इन गंभीर बीमारियों का रामबाण इलाज

Uttarakhand News: उत्‍तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पायी जाने वाली एक ऐसी घास जिसको छूने से झनझनाहट के साथ ही हर किसी के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। जी हां आप सही समझ रहे हैं। हम बात कर रहें हैं बिच्‍छू घास(Bichhu Ghas) की। अगर आप सोच रहे हैं कि बिच्छू घास एक सामान्य और व्यर्थ समझे जाने वाली घास है, तो आपको बता दें कि यह घास कोई सामान्य घास नहीं है बल्कि औषधीय गुणों से भरपूर है। कुमाऊँ-मंडल मैं इसे सिंसोण(Sishun) तथा गढ़वाल मे कंडाली घास(Kandali) के नाम से जाना जाता है।

बिच्छू घास का औषधीय उपयोग:
बिच्छू घास का उपयोग पित्त ,मोच, जकड़न और मलेरिया के इलाज में होने के साथ- साथ इसके बीजों को पेट साफ करने वाली दवा के रूप मे उपयोग किया जाता है। माना जाता है कि बिच्छू घास में आयरन अधिक मात्रा में पाया जाता है। जिसकी वजह से देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में तक इसकी दवाइयां बनती हैं। वहीं काफी गर्म होने की वजह से पर्वतीय क्षेत्रों में इसकी सब्जी भी बनती है जो कि बेहद स्वादिष्ट एवं लाजवाब होती।

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