कुमाऊँ

उत्तराखंड का प्रसिद्ध त्योहार हरेला, आज इन सात अनाजों को बोया जाएगा

harela festival uttarakhand

Harela festival- देवभूमि उत्तराखंड त्योहारों और उत्सवों का प्रदेश है यहां के पारंपरिक त्यौहार और लोक उत्सव पूरी दुनिया में महत्व रखते हैं और देवभूमि का एक प्रसिद्ध त्योहार है हरेला त्यौहार और श्रावण मास में यह हरेला त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है।

हरेले में बोए जाते हैं सात अनाज

देवभूमि में श्रावण मास के पहले दिन घरों में हरेला बोया जाता है और नौवें दिन उस हरेले को काटकर त्यौहार मनाया जाता है हरेला त्यौहार के लिए 9 दिन पूर्व लोग घर के शुद्ध बर्तन में गेहूं, मक्का, जौ, उड़द, तिल, सरसों, गहट, भट्ट जैसे अनाज होते हैं और इसे अपने मंदिर में पवित्र स्थान पर स्थापित करते हैं। और 9 दिन तक हरेली की पानी से सिंचाई कर देखभाल की जाती है साथिया ध्यान रखा जाता है कि सूर्य की रोशनी इस पर ना पड़े।harela festival

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हरेले में मिलता है यह आशीर्वाद

हरेला बोने के ठीक 9 दिन बाद हरेला पर्व मनाया जाता है घर के बुजुर्ग पूजा अर्चना करने के बाद इस हरेले के पौधे को अपने इष्ट देवता को समर्पित करते हैं साथ ही घर के सभी सदस्यों को हरेला चढ़ाया जाता है और उनके कानों के ऊपर या सर में रखा जाता है। इस दिन कहावत है कि जो भी पौधा आप लगाओगे वह अवश्य फलेगा लेगा और फूलेगा।harela festival

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इस दिन कुमाऊँनी भाषा में गीत गाते हुए छोटों को आशीर्वाद दिया जाता है –

जी रये, जागि रये, तिष्टिये, पनपिये,
दुब जस हरी जड़ हो, ब्यर जस फइये,
हिमाल में ह्यूं छन तक,
गंग ज्यू में पांणि छन तक,
यो दिन और यो मास भेटनैं रये,
अगासाक चार उकाव, धरती चार चकाव है जये,
स्याव कस बुद्धि हो, स्यू जस पराण हो।”

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