उत्तराखण्ड

उत्तराखंड- सात समुंदर पार US रहने वाले रायन के गानों ने मचाया धमाल- विदेशी धरती पर पहाड़ की संस्कृति का अनूठा मेल

Pithoragarh News- पहाड़ की समृद्ध संस्कृति और बोली को यूएसए के रहने वाले रायन बढ़ावा देने में जुटे है। आठ साल के रायन ने दो लोकप्रिय गढ़वाली और कुमाउँनी गीतों को सुर देकर धमाल मचा रखा है। एक महीने में उनके गीतों को यूट्यूब पर एक लाख 11 हजार लोग देख चुके है। लोगों के प्यार से गदगद रायन दो और गीतों को सुर देने में जुटे हैं।

यूएसए के बोस्टन में रहने भुवन गिरी आईटी कंपनी में नौकरी करते है। मूल रूप से पिथौरागढ़ के रहने वाले भुवन के दिलों दिमाग में पहाड़ बसा हुआ है। यही वजह है कि विदेश में रहने के बावजूद वे अपनी बोली, संस्कृति से न सिर्फ जुड़े है बल्कि बोस्टन में ध्वजवाहक भी है। भुवन के आठ साल के बेटे रायन ने भी पहले हिंदी और कुमाउँनी सीखने के बाद गाने गाये और दोनों गानों को लोगों ने पसंद किए है।

भुवन का कहना है कि बचपन से ही पहाड़ को जिया है। और पहाड़ की लोक संस्कृति उनके खून में रची बसी है। उनका बेटा कभी हिंदीतक नहीं बोल पाता था लेकिन अब रायन अपनी बोली में गीतों को गाने लगा है। बताया कि प्रख्यात लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के लोकप्रिय गाने ‘ठंडो रे ठंडों में से उन्होंने दो लाइनें ली थी और बाकी गीत उन्होंने खुद लिखा है। वहीं ललित मोहन जोशी के गाने टक टका टक कमला गीत को भी आधुनिक तरीके से गाया गया है। अब बोस्टन में स्कूल खुल रहे है। लेकिन पहाड़ी गानों को गाने का सिलसिला जारी रहेगा। कोशिश रहेगी कि एक महीने में एक गाना रायन जरूर गाये। प्रयास यही है कि लोकसंस्कृति और बोली बची रहे। लोग अपने बच्चों को बोली, भाषा, संस्कृति से जरूर रुबरू कराए ,चाहे वे जहां भी रहें। हमेशा अपने जड़ों से जुड़े रहें।

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